तुम नहीं ग़म नहीं शराब नहीं

तुम नहीं ग़म नहीं शराब नहीं
ऐसी तन्हाई का जवाब नहीं

(ग़म : grief, pain; तन्हाई : loneliness, solitude)

गाहे-गाहे इसे पढा कीजे
दिल से बेहतर कोई किताब नहीं

(गाहे-गाहे : once in a while)

जाने किस किस की मौत आयी है
आज रुख़ पर कोई नक़ाब नहीं

(रुख : face; नक़ाब : veil)

वो करम उन्गलियों पे गिरते हैं
ज़ुल्म का जिनके कुछ हिसाब नहीं

(करम : good deeds, favours; हिसाब : calculation)

सईद राही

3 Responses to “तुम नहीं ग़म नहीं शराब नहीं”

  1. डा प्रभात टन्डन Says:

    अरे आप भी जगजीत सिंह के मुरीद लगते हैं, लेकिन अपना परिचय आपने क्यों छुपा लिया है।क्या यह कुछ राज की बात तो नही है।

    प्रभात

  2. Mohib Says:

    परिचय की क्या बात है, पूरा ब्लाग ही उपलब्ध है. ये देखिये http://mohib.net/blog/

  3. Siyaah Says:

    Jagjit really has an amazing ability to bring out the most in the simplest sounding ghazals…

    Great site. keep it up.

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