तुम नहीं ग़म नहीं शराब नहीं
तुम नहीं ग़म नहीं शराब नहीं
ऐसी तन्हाई का जवाब नहीं
(ग़म : grief, pain; तन्हाई : loneliness, solitude)
गाहे-गाहे इसे पढा कीजे
दिल से बेहतर कोई किताब नहीं
(गाहे-गाहे : once in a while)
जाने किस किस की मौत आयी है
आज रुख़ पर कोई नक़ाब नहीं
(रुख : face; नक़ाब : veil)
वो करम उन्गलियों पे गिरते हैं
ज़ुल्म का जिनके कुछ हिसाब नहीं
(करम : good deeds, favours; हिसाब : calculation)
सईद राही
August 26th, 2006 at 10:38 am
अरे आप भी जगजीत सिंह के मुरीद लगते हैं, लेकिन अपना परिचय आपने क्यों छुपा लिया है।क्या यह कुछ राज की बात तो नही है।
प्रभात
August 28th, 2006 at 1:34 am
परिचय की क्या बात है, पूरा ब्लाग ही उपलब्ध है. ये देखिये http://mohib.net/blog/
September 27th, 2006 at 12:34 pm
Jagjit really has an amazing ability to bring out the most in the simplest sounding ghazals…
Great site. keep it up.