August 6th, 2006
पहले तो अपने दिल की रज़ा जान जाइये
फिर जो निगाहे यार कहे मान जाइये
(रज़ा : approval; निगाहे यार : eyes of the beloved)
पहले मिज़ाजे राहगुज़र जान जाइये
फिर गर्दे राह जो भी कहे मान जाइये
(मिज़ाजे राहगुज़र : nature of the pathway; गर्दे राह : dust of the path)
कुछ कह रही है आपके सीने की ढड़कनें
मेरी सुनें तो दिल का कहा मान जाइये
एक धूप सी जमी है आँखों के आस-पास
ये आप हैं तो आप पे क़ुर्बान जाइये
शायद हुज़ूर से कोई निसबत हमें भी हो
आँखों में झाँक कर हमें पहचान जाइये
(निसबत : relation, affinity)
क़तील शिफ़ाई
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August 6th, 2006
अँगड़ाई पर अँगड़ाई लेती है रात जुदाई की
तुम क्या समझो तुम क्या जानों बात मेरी तन्हाई की
कौन सियाही घोल रहा था वक्त के बहते दरिया में
मैनें आँख झुकी देखी है आज किसी हरजाई की
(सियाही : ink; हरजाई : oppressor, tyrant)
वस्ल की रात ने जाने क्यूँ इसरार था उनको जाने पर
वक्त से पहले डूब गये, तारों ने बड़ी दानाई की
(वस्ल : meeting; इसरार : insistence; दानाई : wisdom, knowledge)
उड़ते उड़ते आस का पँछी दूर उफ़क़ में डूब गया
रोते रोते बैठ गयी आवाज़ किसी सौदाई की
(उफ़क़ : horizon; सौदाई : melancholic, madman)
क़तील शिफ़ाई
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August 6th, 2006
सदमा तो है मुझे भी के तुझसे जुदा हूँ मैं
लेकिन ये सोचता हूँ के अब तेरा क्या हूँ मैं
(सदमा : shock; जुदा : separated)
बिखरा पड़ा है तेरे घर में तेरा वजूद
बेकार महफिलों में तुझे ढूँडता हूँ मैं
(वजूद : existence)
ना जाने किस अदा से लिया तूने मेरा नाम
दुनिया समझ रही है के सब कुछ तेरा हूँ मैं
(अदा : style)
ले मेरे तजुर्बों से सबक़ ऐ मेरे रक़ीब
दो-चार साल उम्र में तुझसे बड़ा हूँ मैं
(तजुर्बों से : from experiences; सबक़ : lesson; रक़ीब : rival in love)
क़तील शिफ़ाई
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August 6th, 2006
तुम्हारी अन्जुमन से उठ के दीवाने कहाँ जाते
जो वाबिस्ता हुये तुम से वो अफसाने कहाँ जाते
(अन्जुमन : gathering, assembly; वाबिस्ता : attached)
निकल करा दैरो काबा से अगर मिलता ना मैख़ाना
तो ठुकराये हुये इन्सान ख़ुदा जाने कहाँ जाते
(दैरो काबा : temple and the mosque; मैख़ाना : wine-house, tavern)
तुम्हारी बेरुख़ी ने लाज रख ली बादा-ख़ाने की
तुम आँखों से पिला देते तो पैमानें कहाँ जाते
(बेरुख़ी : rudeness; बादा-ख़ाने : wine-houese, tavern; पैमानें : glasses of wine)
चलो अच्छा हुआ काम आ गयी दीवानग़ी अपनी
वगरना हम जमाने भर को समझाने कहाँ जाते
(वगरना : otherwise)
क़तील शिफ़ाई
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August 6th, 2006
दिल को ग़मे हयात गवारा है इन दिनों
पहले जो दर्द था वही चारा है इन दिनों
(ग़मे हयात : sufferings of life; चारा : cure, remedy)
ये दिल, ज़रा सा दिल तेरी यादों में खो गया है
ज़र्रे को आँन्धियों का सहारा है इन दिनों
(ज़र्रा : dust particle)
तुम आ ना सको तो शब को बढ़ा दूँ कुछ और भी
अपने कहे में सुब्ह का तारा है इन दिनों
(शब : night)
क़तील शिफ़ाई
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August 6th, 2006
ये मोजेज़ा भी मुहब्बत कभी दिखाये मुझे
के सँग तुझपे गिरे और ज़ख्म आये मुझे
(मोजेज़ा : miracle; सँग: stone; ज़ख्म : wound)
वो मेहरबाँ है तो इक़रार क्यूँ नहीं करता
वो बद-गुमाँ है तो सौ बार आज़माये मुझे
(मेहरबाँ : benign; इक़रार : accept; बद-गुमाँ : doubtful; आज़माये : test)
वो मेरा दोस्त है सारे जहाँन को मालूम
दग़ा करे वो किसी से तो शर्म आये मुझे
(जहाँन : world; दग़ा : fraud; शर्म : shame)
मैं अपनी ज़ात में नीलाम हो रहा हूँ ‘क़तील’
ग़मे हयात से कह दो ख़रीद लाये मुझे
(ज़ात : self, soul, being; ग़मे हयात : sufferings of the life)
क़तील शिफ़ाई
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August 5th, 2006
परेशाँ रात सारी है, सितारों तुम तो सो जाओ
सुकूते मर्ग तारी है, सितारों तुम तो सो जाओ
(परेशाँ : disordered, troubled; सुकूते मर्ग : silence before death; तारी : prevalent)
हमें तो आज की शब पौ फटे तक जागना होगा
यही किस्मत हमारी है, सितारों तुम तो सो जाओ
(शब : night; पौ फटे : till dawn)
हमें भी नींद आ जाएगी, हम भी सो जाऐंगे
अभी कुछ बेक़रारी है, सितारों तुम तो सो जाओ
(बेक़रारी : restlessness)
क़तील शिफ़ाई
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August 5th, 2006
मिल कर जुदा हुए तो ना सोया करेंगे हम
एक दूसरे की याद में रोया करेंगे हम
आँसू छलक छलक के सताएँगे रात भर
मोती पलक पलक में पिरोया करेंगे हम
(पलक : eyelids)
जब दूरियों की आग दिलों को जगाएगी
जिस्मों को चाँन्दनी में भिगोया करेंगे हम
गर दे गया दग़ा हमें तूफान भी ‘क़तील’
साहिल पे कश्तियों को डुबोया करेंगे हम
(गर : if; दग़ा : fraud; साहिल : sea-shore; कश्ती : boat)
क़तील शिफ़ाई
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August 5th, 2006
अपने हाथों की लकीरों में बसा ले मुझको
मैं हूँ तेरा तो नसीब अपना बना ले मुझको।
( नसीब : destiny)
मुझसे तू पूछने आया है वफ़ा के माने
ये तेरी सादा-दिली मार ना डाले मुझको।
( वफ़ा : fidelity, loyalty; सादा-दिली : simplicity)
ख़ुद को मैं बाँट ना डालूँ कहीं दामन-दामन
कर दिया तूने अगर मेरे हवाले मुझको।
(दामन-दामन : in tatters)
वादा फिर वादा है मैं ज़हर भी पी जाऊँ ‘क़तील’
शर्त ये है कोई बाहों में सम्भाले मुझको।
(वादा : promise)
क़तील शिफ़ाई
साभार : Ghazal Lyrics
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