इश्क में ग़ैरत-ए-जज़्बात ने रोने ना दिया
Saturday, August 26th, 2006इश्क में ग़ैरत-ए-जज़्बात ने रोने ना दिया
वरना क्या बात थी किस बात ने रोने ना दिया
(ग़ैरत-ए-जज़्बात : pride of the emotions)
आप कहते थे के रोने से ना बदलेंगे नसीब
उम्र भर आपकी इस बात ने रोने ना दिया
रोने वालों से कह दो उनका भी रोना रो लें
जिनको मजबूरी-ए-हालात ने रोने ना दिया
(मजबूरी-ए-हालात : constraints)
तुझसे मिलकर हमें रोना था बहुत रोना था
तन्गी-ए-वक़्त-ए-मुलाक़ात ने रोने ना दिया
(तन्गी-ए-वक़्त-ए-मुलाक़ात : scarcity of the time of meeting)
सुदर्शन फ़ाकिर