Archive for the ‘Saeed Rahi’ Category

कोई पास आया सवेरे सवेरे

Tuesday, August 29th, 2006

कोई पास आया सवेरे सवेरे
मुझे आज़माया सवेरे सवेरे

(आज़माया : tested)

मेरी दास्तां को ज़रा सा बदल कर
मुझे ही सुनाया सवेरे सवेरे

(दास्तां : story)

जो कहता था कल संभलना संभलना
वही लड़खड़ाया सवेरे सवेरे

कटी रात सारी मेरी मयकदे में
ख़ुदा याद आया सवेरे सवेरे

(मयकदे में : in winehouse, tavern)

सईद राही

साभार : मेरा पन्ना

दोस्त बन बन के मिले मुझको मिटानेवाले

Thursday, August 10th, 2006

दोस्त बन बन के मिले मुझको मिटानेवाले
मैं ने देखे हैं कई रंग बदलनेवाले

तुमने चुप रहकर सितम और भी ढाया मुझ पर
तुमसे अच्छे हैं मेरे हाल पे हंसनेवाले

(सितम : injustice)

मैं तो इख़लाक़ के हाथों ही बिका करता हूं
और होंगे तेरे बाज़ार में बिकनेवाले

(इख़लाक : good nature)

आख़री बार सलाम-ए-दिल-ए-मुज़्तर ले लो
फिर ना लौटेंगे शब-ए-हिज्र पे रोनेवाले

(आख़री : last; सलाम-ए-दिल-ए-मुज़्तर : salutation from the distressed heart)

सईद राही

साभार : मेरा पन्ना