Archive for the ‘Prem Warbartoni’ Category

मेरी तन्हाईयों तुम ही लगा लो मुझको सीने से

Wednesday, August 30th, 2006

मेरी तन्हाईयों तुम ही लगा लो मुझको सीने से
कि मैं घबरा गया हूँ इस तरह रो रो के जीने से

(मेरी तन्हाईयों : my loneliness)

ये आधी रात को फिर चूड़ियों सा क्या खनकता है
कोई आता है या मेरी ही ज़न्जीरें खनकती हैं
ये बातें किस तरह पूछूँ मैं सावन के महीने से

(ज़न्जीरें : chains, shackles)

मुझे पीने दो अपने ही लहू का जाम पीने दो
ना सीने दो किसी को भी मेरा दामन ना सीने दो
मेरी वहशत ना बढ जाये कहीं दामन के सीने से

(लहू : blood; जाम : glass; दामन : collar; वहशत : loneliness, destitution)

प्रेम वरबारतोनी