Archive for the ‘Nida Fazli’ Category

दुनिया जिसे कहते हैं जादू का ख़िलौना हैं

Wednesday, August 23rd, 2006

दुनिया जिसे कहते हैं जादू का ख़िलौना हैं
मिल जाये तो मिट्टी हैं खो जाये तो सोना है

अच्छा सा कोई मौसम तन्हा सा कोई आलम
हर वक़्त का ये रोना तो बेकार का रोना हैं

(तन्हा : lonely; आलम : grief, pain, misfortune)

बरसात का बादल तो दीवाना है क्या जाने
किस राह से बचना हैं किस छत को भिगौना हैं

ग़म हो कि ख़ुशी दोनो कुछ देर के साथी हैं
फिर रास्ता ही रास्ता हैं हंसना है ना रोना हैं

(ग़म : grief, suffering)

निदा फ़ाज़ली

साभार : Kailash