आए हैं समझाने लोग
Sunday, August 13th, 2006आए हैं समझाने लोग
हैं कितने दीवाने लोग
दैर-ओ-हरम में चैन जो मिलता
क्यूं जाते मैखाने लोग
(दैर-ओ-हरम : temple and the mosque; चैन : solace; मैखाने : tavern, wine-house)
जान के सब कुछ कुछ भी ना जाने
हैं कितने अन्जाने लोग
(अन्जाने : strangers)
वक़्त पे काम नहीं आते हैं
ये जाने पहचाने लोग
अब जब मुझको होश नहीं है
आए हैं समझाने लोग
कुँवर महेंन्द्र सिंह बेदी ‘सहर’
साभार: गीतायन