Archive for the ‘Jigar Moradabadi’ Category

हर सू दिखाई देते हैं वो जलवागर मुझे

Thursday, August 24th, 2006

हर सू दिखाई देते हैं वो जलवागर मुझे
क्या-क्या फरेब देती है मेरी नज़र मुझे

(हर सू : in every direction; जलवागर : manifest, splendid; फरेब : tricks; नज़र : sight, vision)

डाला है बेखुदी ने अजब राह पर मुझे
आखें हैं और कुछ नहीं आता नज़र मुझे

(बेखुदी : unconsciousness)

दिल ले के मेरा देते हो दाग़-ए-जिगर मुझे
ये बात भूलने की नहीं उम्र भर मुझे

(दाग़-ए-जिगर : burnt marks on the soul [actually liver, but that is so un-romantic!])

आया ना रास नाला-ए-दिल का असर मुझे
अब तुम मिले तो कुछ नहीं अपनी ख़बर मुझे

(नाला-ए-दिल : tears and lamentation of the heart; असर : effect; ख़बर : knowledge, information, gnosis)

जिगर मुरादाबादी

दर्द बढ कर फुगाँ ना हो जाये

Tuesday, August 15th, 2006

दर्द बढ कर फुगाँ ना हो जाये
ये ज़मीं आसमाँ ना हो जाये

(फुगाँ : lamentation; ज़मीं : earth; आसमाँ : sky)

दिल में डूबा हुआ जो नश्तर है
मेरे दिल की ज़ुबाँ ना हो जाये

(नश्तर : dagger; ज़ुबाँ : voice)

दिल को ले लीजिए जो लेना हो
फिर ये सौदा गराँ ना हो जाये

(सौदा : bargain; गराँ : costly)

आह कीजिए मगर लतीफ़-तरीन
लब तक आकर धुआँ ना हो जाये

(आह : sigh; लतीफ़-तरीन : pleasant; धुआँ : smoke)

जिगर मुरादाबादी