Archive for the ‘Firaq Gorakhpuri’ Category

बहुत पहले से उन क़दमों की आहट जान लेते हैं

Monday, August 14th, 2006

बहुत पहले से उन क़दमों की आहट जान लेते हैं
तुझे ऐ ज़िन्दगी हम दूर से पहचान लेते हैं

तबीयत अपनी घबराती है जब सुनसान रातों में
हम ऐसे में तेरी यादों की चादर तान लेते हैं

मेरी नज़रें भी ऐसे क़ातिलों का जान-ओ-ईमान है
निगाहें मिलते ही जो जान और ईमान लेते हैं

(नज़रें : eyes, glances; क़ातिल : murderer; जान-ओ-ईमान : life and belief)

‘फिराक़’ बदल कर भेष मिलता है कोई क़ाफ़िर
कभी हम जान लेते हैं कभी पहचान लेते हैं

(क़ाफ़िर : non-believer)

फिराक़ गोरखपुरी

रात भी, नींद भी, कहानी भी

Monday, August 7th, 2006

रात भी, नींद भी, कहानी भी
हाए! क्या चीज़ है जवानी भी

दिल को शोलों से करती है सैलाब
ज़िन्दगी आग भी है, पानी भी

(शोला : fire ball; सैलाब : flood)

हर्फ क्या क्या मुझे नहीं कहती
कुछ सुनूँ मैं तेरी ज़ुबानी भी

(हर्फ : words)

पास रहना किसी का रात की रात
मेहमानी भी, मेज़बानी भी

(मेहमानी : to visit as a guest; मेज़बानी : to host a guest)

फिराक़ गोरखपुरी