August 30th, 2006
मेरी तन्हाईयों तुम ही लगा लो मुझको सीने से
कि मैं घबरा गया हूँ इस तरह रो रो के जीने से
(मेरी तन्हाईयों : my loneliness)
ये आधी रात को फिर चूड़ियों सा क्या खनकता है
कोई आता है या मेरी ही ज़न्जीरें खनकती हैं
ये बातें किस तरह पूछूँ मैं सावन के महीने से
(ज़न्जीरें : chains, shackles)
मुझे पीने दो अपने ही लहू का जाम पीने दो
ना सीने दो किसी को भी मेरा दामन ना सीने दो
मेरी वहशत ना बढ जाये कहीं दामन के सीने से
(लहू : blood; जाम : glass; दामन : collar; वहशत : loneliness, destitution)
प्रेम वरबारतोनी
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August 29th, 2006
कोई पास आया सवेरे सवेरे
मुझे आज़माया सवेरे सवेरे
(आज़माया : tested)
मेरी दास्तां को ज़रा सा बदल कर
मुझे ही सुनाया सवेरे सवेरे
(दास्तां : story)
जो कहता था कल संभलना संभलना
वही लड़खड़ाया सवेरे सवेरे
कटी रात सारी मेरी मयकदे में
ख़ुदा याद आया सवेरे सवेरे
(मयकदे में : in winehouse, tavern)
सईद राही
साभार : मेरा पन्ना
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August 28th, 2006
वो नहीं मिलता मुझे इसका गिला अपनी जगह
उसके मेरे दरमियाँ फासिला अपनी जगह
(गिला : complaint; दरमियाँ : in between; फासिला : distance)
ज़िन्दगी के इस सफ़र में सैकड़ों चेहरे मिले
दिल-कशी उनकी अलग, पैकर तेरा अपनी जगह
(सफ़र : journey; दिल-कशी : charm; पैकर : benchmark, paradigm)
तुझसे मिल कर आने वाले कल से नफ़रत मोल ली
अब कभी तुझसे ना बिछरूँ ये दुआ अपनी जगह
इस मुसलसल दौड में है मन्ज़िलें और फासिले
पाँव तो अपनी जगह हैं रास्ता अपनी जगह
(मुसलसल : continuous; मन्ज़िलें और फासिले : destinations and distances)
इफ़्तिक़ार इमाम सिद्दीक़ी
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August 27th, 2006
यार ने मुझको मुझे यार ने सोने ना दिया
रात भर ताल-ए-बेदार ने सोने ना दिया
(ताल-ए-बेदार : like a thorn)
एक शब बुलबुल-ए-बेताब के जागे ना नसीब
पहलू-ए-गुल में कभी ख़ार ने सोने ना दिया
(शब : night; बुलबुल-ए-बेताब : restless nigtingale; पहलू-ए-गुल : in the company of flowers; ख़ार : thorns)
रात भर की दिल-ए-बेताब ने बातें मुझसे
मुझको इस इश्क के बीमार ने सोने ना दिया
(दिल-ए-बेताब : restless heart)
हैदर अली आतिश
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August 26th, 2006
इश्क में ग़ैरत-ए-जज़्बात ने रोने ना दिया
वरना क्या बात थी किस बात ने रोने ना दिया
(ग़ैरत-ए-जज़्बात : pride of the emotions)
आप कहते थे के रोने से ना बदलेंगे नसीब
उम्र भर आपकी इस बात ने रोने ना दिया
रोने वालों से कह दो उनका भी रोना रो लें
जिनको मजबूरी-ए-हालात ने रोने ना दिया
(मजबूरी-ए-हालात : constraints)
तुझसे मिलकर हमें रोना था बहुत रोना था
तन्गी-ए-वक़्त-ए-मुलाक़ात ने रोने ना दिया
(तन्गी-ए-वक़्त-ए-मुलाक़ात : scarcity of the time of meeting)
सुदर्शन फ़ाकिर
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August 26th, 2006
कौन कहता है मुहब्बत की ज़ुबाँ होती है
ये हक़ीक़त तो निगाहों से बयाँ होती है
( ज़ुबाँ : tongue, voice; हक़ीक़त : reality, truth; निगाहों से : through eyes; बयाँ : be described)
वो ना आये तो सताती है एक ख़लिश दिल को
वो जो आये तो ख़लिश और जवाँ होती है
(ख़लिश : anxiety, apprehension; जवाँ : youthful)
रूह को शाद करे दिल को पुर-नूर करे
हर नज़ारे में ये तनवीर कहाँ होती है
(रूह : soul; शाद : make happy, please; पुर-नूर : fill with lighten, luminous; नज़ारे : visions; तनवीर : illumination)
ज़ब्त-ए-सैलाब-ए-मुहब्बत को कहाँ तक रोके
दिल में जो बात हो आखों से बयाँ होती है
(ज़ब्त : patience, restraint; सैलाब-ए-मुहब्बत : flood of love)
ज़िन्दगी एक सुलगती सी चिता है “साहिर”
शोला बनती है ना ये बुझ के धुआँ होती है
(चिता : funeral pyre)
साहिर होशियारपुरी
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August 25th, 2006
तुम नहीं ग़म नहीं शराब नहीं
ऐसी तन्हाई का जवाब नहीं
(ग़म : grief, pain; तन्हाई : loneliness, solitude)
गाहे-गाहे इसे पढा कीजे
दिल से बेहतर कोई किताब नहीं
(गाहे-गाहे : once in a while)
जाने किस किस की मौत आयी है
आज रुख़ पर कोई नक़ाब नहीं
(रुख : face; नक़ाब : veil)
वो करम उन्गलियों पे गिरते हैं
ज़ुल्म का जिनके कुछ हिसाब नहीं
(करम : good deeds, favours; हिसाब : calculation)
सईद राही
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August 24th, 2006
हर सू दिखाई देते हैं वो जलवागर मुझे
क्या-क्या फरेब देती है मेरी नज़र मुझे
(हर सू : in every direction; जलवागर : manifest, splendid; फरेब : tricks; नज़र : sight, vision)
डाला है बेखुदी ने अजब राह पर मुझे
आखें हैं और कुछ नहीं आता नज़र मुझे
(बेखुदी : unconsciousness)
दिल ले के मेरा देते हो दाग़-ए-जिगर मुझे
ये बात भूलने की नहीं उम्र भर मुझे
(दाग़-ए-जिगर : burnt marks on the soul [actually liver, but that is so un-romantic!])
आया ना रास नाला-ए-दिल का असर मुझे
अब तुम मिले तो कुछ नहीं अपनी ख़बर मुझे
(नाला-ए-दिल : tears and lamentation of the heart; असर : effect; ख़बर : knowledge, information, gnosis)
जिगर मुरादाबादी
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August 23rd, 2006
दुनिया जिसे कहते हैं जादू का ख़िलौना हैं
मिल जाये तो मिट्टी हैं खो जाये तो सोना है
अच्छा सा कोई मौसम तन्हा सा कोई आलम
हर वक़्त का ये रोना तो बेकार का रोना हैं
(तन्हा : lonely; आलम : grief, pain, misfortune)
बरसात का बादल तो दीवाना है क्या जाने
किस राह से बचना हैं किस छत को भिगौना हैं
ग़म हो कि ख़ुशी दोनो कुछ देर के साथी हैं
फिर रास्ता ही रास्ता हैं हंसना है ना रोना हैं
(ग़म : grief, suffering)
निदा फ़ाज़ली
साभार : Kailash
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August 22nd, 2006
जब कभी तेरा नाम लेते है
दिल से हम इन्तिक़ाम लेते है
(इन्तिक़ाम : revenge)
मेरे बरबादियों के अफ़साने
मेरे यारों के नाम लेते है
(अफ़साने : tales, stories)
बस यही एक जुर्म है अपना
हम मोहब्बत से काम लेते है
(जुर्म : crime)
हर कदम पर गिरे मगर सीखा
कैसे गिरतों को थाम लेते है
हम भटककर जुनूँ की राहों मे
अक़्ल से इंतिकाम लेते है
(जुनूँ : frenzy, madness; अक़्ल : mind, intellect)
सरदार अंजुम
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